एक तरफ पेट्रोल पंपो, गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें और दूसरी तरफ अफवाहे—सरकार ने भारतवासियों को दिलाया भरोसा, पर्याप्त भंडारण और स्थिति नियंत्रण में
छत्तीसगढ़/जशपुर:पत्थलगांव(दिपेश रोहिला) । अमेरिका,इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर लोगों के लिए चिंता की लहर पैदा कर दी है। इस संघर्ष को लगभग एक महीना होने को है और इसके असर अब सीधे तौर पर भारत के कई बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक महसूस किए जा रहे हैं। हालांकि युद्ध हजारों किलोमीटर दूर हो रहा है, परन्तु उसके संभावित प्रभावों को लेकर भारत में एक तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव देखने को मिल रहा है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, लोग अपनी गाड़ियों में अतिरिक्त ईंधन भरवाने के लिए उमड़ रहे हैं। यही स्थिति एलपीजी गैस एजेंसियों के बाहर भी दिखाई दे रही है, जहां सिलेंडर लेने के लिए लोगों की भीड़ के साथ साथ कतारों में खड़े लोग दिख रहे है। यह वर्तमान समय कुछ हद तक कोरोना काल की शुरुआती घबराहट की याद दिलाता है, जब आवश्यक वस्तुओं की कमी की आशंका ने लोगों को जल्दबाजी में खरीदारी के लिए मजबूर कर दिया था।
दरअसल यह स्थिति वास्तविक कमी से ज्यादा आशंका और अफवाहों के कारण पैदा हुई है, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार आ रही खबरों ने लोगों के मन में एक यह डर बैठा दिया है कि यदि युद्ध और बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। खासतौर पर स्टेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर चर्चाएं तेज है, जोकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। इसी बीच दुनिया के लोकप्रिय नेता एवं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा जा चुका है कि देशवासी घबराएं नहीं, उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त मात्रा में भंडारण है और आने वाले समय में आम जनता को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, उन्होंने यह भी कहा है कि देश ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का डटकर सामना किया है और इस चुनौती से भी मजबूती से निपटा जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे समय में नेतृत्व का स्पष्ट और संयमित संदेश ही जनता के मन से डर को कम करता है, उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से ईंधन और गैस का संग्रह न करें, क्योंकि इससे कृत्रिम संकट पैदा हो सकता है। वहीं भारतीय विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि वर्तमान स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत स्थिति में है। भारत लंबे समय से अपने तेल आयात स्रोतों को विविध बना रहा है और केवल एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा देश के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी मौजूद हैं, जिनका उपयोग आपातकालीन स्थितियों में किया जा सकता है।
जहां तक स्टेट् ऑफ हॉर्मुज़ की बात है तो यह निश्चित रूप से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक संवेदनशील क्षेत्र है। यहां से दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। वर्तमान में कई देशों के युद्धपोत और जहाज इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और ईरान भी इस पर कड़ी नजर बनाए हुए है। लेकिन अभी तक इस मार्ग को पूरी तरह से बंद करने जैसी कोई स्थिति नहीं बनी है। भारत ने भी इस मार्ग से कई एलपीजी और क्रूड ऑयल की खेप सुरक्षित रूप से अपने तटों तक पहुंचा ली है, जो यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से बाधित नहीं हुई है। यही कारण है कि सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर रही है कि देश में ईंधन की कोई तत्काल कमी नहीं है।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का भी है जो खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। लाखों भारतीय वहां रोजगार के लिए रहते हैं। इस युद्ध के बीच कई लाखों भारतीयों को भारत लाया जा चुका है, सरकार ने आश्वासन दिया है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर विभिन्न प्रकार के बयान सामने आ रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में यह कहा गया कि अमेरिका ने कुछ दिनों के लिए युद्ध से पीछे हटने का संकेत दिया है, जबकि अन्य खबरों में यह दावा किया गया कि अमेरिका एक लंबे विराम की कोशिश कर रहा है।
वहीं ईरान ने दुनिया के सामने इन सभी बयानों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी किसी प्रकार की बातचीत नहीं हुई है और वह अपने रुख पर कायम है। इस तरह की विरोधाभासी खबरें आम जनता के बीच भ्रम और डर को बढ़ाती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ बार-बार यह सलाह दे रहे हैं कि लोग केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें। वास्तविकता यह है कि वैश्विक स्तर पर तनाव जरूर है, लेकिन हर तनाव सीधे युद्ध में तब्दील हो जाए, यह जरूरी नहीं होता। कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी रहते हैं और अक्सर पर्दे के पीछे कई स्तरों पर बातचीत होती रहती है।
भारत जैसे बड़े और मजबूत देश के लिए इस प्रकार की चुनौतियां कोई नई नहीं हैं। ऊर्जा सुरक्षा, विदेश नीति और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश ने समय के साथ अपनी क्षमता को काफी मजबूत किया है। यही कारण है कि सरकार आत्मविश्वास के साथ कह पा रही है कि स्थिति नियंत्रण में है। ऐसे वक्त में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका आम नागरिकों की भी होती है कि घबराहट में आकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी करना न केवल खुद के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी समस्या खड़ी करता है, यदि हर व्यक्ति संयम बनाए रखे और केवल आवश्यकतानुसार ही संसाधनों सामानों का उपयोग करे तो किसी भी संभावित संकट को आसानी से टाला जा सकता है।
अंततः यह समझना जरूरी है कि लोगों में डर अक्सर जानकारी की कमी और अफवाहों से पैदा होता है, जब तथ्य स्पष्ट होते हैं और नेतृत्व भरोसा देता है तो स्थिति संभल जाती है। वर्तमान हालात में भारत पूरी तरह सजग और तैयार है। इसलिए जरूरत है सतर्क रहने की लेकिन भयभीत होने की नहीं। देश ने पहले भी बड़ी चुनौतियों को पार किया है और इस बार भी संयम, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी से हर कठिनाई को पीछे छोड़ा जा सकता है।


