पत्थलगांव (दिपेश रोहिला) । शराब के नशे में घरेलू विवाद के दौरान पत्नी और सास की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी खीरसागर यादव को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया है। यह फैसला नए कानून (भा.न्या.सं. की धारा 103(1)) के तहत सुनाया गया है, जिसे क्षेत्र में न्यायिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। मामले का संक्षिप्त विवरण इस तरह है कि प्रार्थी चक्रधर यादव उम्र 50 वर्ष, निवासी खजरीढाप चौकी कोतबा ने 18 नवंबर 2024 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका पुत्र खीरसागर यादव, जो पहले केरल में रहकर काम करता था, लगभग एक वर्ष पूर्व घर लौटा और अपने साथ पत्नी रोशनी बाई (26 वर्ष) एवं दो छोटे बच्चों को लेकर आया। महिला के अलग जाति की होने के कारण परिवार ने उसे अलग निवास हेतु जमीन और मकान दे दिया था।
आरोपी खीरसागर यादव एवं उसकी पत्नी के बीच शराब के नशे में आए दिन विवाद होता रहता था। 18 नवंबर 2024 की शाम करीब 6 बजे, खाना बनाते समय विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने पहले पत्नी रोशनी बाई पर लकड़ी के डंडे से हमला किया। डंडा टूटने के बाद दूसरे डंडे से सिर पर जोरदार वार किया, जिससे वह मौके पर गिर पड़ी। बीच-बचाव करने आई सास जगरमनी बाई पर भी आरोपी ने बेरहमी से कई वार किए, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
तेज कार्रवाई, मजबूत विवेचना–
घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था, लेकिन जशपुर पुलिस की तत्परता से उसे मात्र 24 घंटे के भीतर 19 नवंबर 2024 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
प्रकरण की विवेचना पत्थलगांव एसडीओपी डॉ. ध्रुवेश कुमार जायसवाल द्वारा अत्यंत गंभीरता, निष्पक्षता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से की गई, जिससे अभियोजन को ठोस साक्ष्य उपलब्ध हो सके। न्यायालय का फैसला दिनांक 2 फरवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) न्यायालय, जशपुर ने अभियोजन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी खीरसागर यादव को भा.न्या.सं. की धारा 103(1) (दो बार) के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा प्रत्येक अपराध पर 500/– 500/– अर्थदंड की सजा सुनाई।
✒️अभियोजन की प्रभावी पैरवी की सराहना इस जघन्य मामले में लोक अभियोजक अजीत रजक द्वारा की गई सशक्त, तथ्यपरक और प्रभावी पैरवी न्यायिक निर्णय में निर्णायक साबित हुई। वहीं एसडीओपी डॉ. ध्रुवेश कुमार जायसवाल की सटीक विवेचना और पुलिस टीम की मुस्तैदी ने यह सुनिश्चित किया कि आरोपी को कानून के शिकंजे से बचने का कोई अवसर न मिले। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि घरेलू हिंसा और जघन्य अपराधों पर कानून पूरी सख्ती से कार्रवाई करेगा।
(एसडीओपी : डॉ. ध्रुवेश जायसवाल, पत्थलगांव)


